मासिक-धर्म रोग के उपाय (Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders)

By | August 10, 2016

मासिक-धर्म रोग के उपाय (Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders) :

मासिक-धर्म रोग के उपाय (Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders) : Masik dharm rog ke upay, Masik dharm ka ilaj, Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders in hindi.

मासिक-धर्म संबन्धी रोग के प्रकार :

  • एमेनोरिया : यदि  किसी लड़की को 16 वर्ष की आयु तक मासिकधर्म शुरू न हो तो उसे एमेनोरिया रोग कहते हैं। यदि एक बार मासिकधर्म शुरू हो जाए और फिर बंद हो जाए तो उसे सेकेन्डरी एमेनोरिया कहते हैं।
  • डिस्मेनोरिया : इस प्रकार के मासिकधर्म में जब मासिकधर्म शुरू होता है तो उससे कुछ समय पहले स्त्री के पेट में दर्द होना शुरू हो जाता है।

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  • मेट्रोरेजिया : इस रोग के कारण स्त्री को मासिकधर्म सही समय पर नहीं आता है जिसे अनियमित मासिकधर्म कहते हैं।
  • मैनोरेजिया : इस रोग में जब स्त्री का मासिकधर्म शुरू होता है तो उसे नियमित दिनों से अधिक दिनों तक रक्तस्राव होता रहता है।
  • हाईपरमैनोरिया : इस मासिकधर्म में मासिकधर्म तो नियमित होता है लेकिन मासिकधर्म में सामान्य दिनों में ही बहुत अधिक रक्तस्राव होता है। Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders.
  • पोलिमेनोरिया : इस प्रकार का मासिकधर्म स्त्री को 21 दिन से भी कम के अंतरराल पर आता है।
  • मिनोमेट्रोरेजिया : इस प्रकार का मासिकधर्म अनियमित रूप में होता है और इसमें रोगी स्त्री को अधिक रक्तस्राव होता है तथा यह सामान्य से अधिक दिनों तक चलता रहता है।
  • हाइपोमैनोरिया : इस प्रकार का मासिकधर्म सामान्य दिनों तक होता है लेकिन इसमे रक्तस्राव कम होता है।

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  • पोस्ट मेनोपाजुअल ब्लीडिंग : इस प्रकार के मासिकधर्म में स्त्रियों को रजोनिवृति (मासिकधर्म का बंद होना) के बाद रक्तस्राव होना शुरू हो जाता है।
  • ब्रेक-थ्रो ब्लीडिंग : इस रोग में स्त्रियों को 2 मासिकधर्मों अर्थात पहला मासिकधर्म समाप्त होने के और दूसरा मासिकधर्म शुरू होने के बीच में रक्तस्राव होता है। यह रोग गर्भनिरोधक गोलियां खाने की वजह से भी हो सकता है।
  • प्री मेन्स्ट्रअल सिन्ड्रोम : यह रोग लगभग 40 प्रतिशत स्त्रियों में पाया जाता है। इस रोग के लक्षण इस प्रकार हैं- सिर में दर्द होना, जी मिचलाना, गुस्सा, थकान, पेट में गैस बनना, कमर में दर्द, अधिक तनाव तथा हाथ-पैरों में सूजन आदि।

मासिकधर्म संबन्धी रोग होने के कारण :

  • स्त्रियों में मासिकधर्म से संबन्धित रोग गलत तरीके से खान-पान के कारण होता है।
  • मासिकधर्म शुरू होने पर संभोगक्रिया करने के कारण स्त्रियों को मासिकधर्म संबन्धित रोग हो जाते हैं।
  • मासिकधर्म के समय कब्ज रहने के कारण भी स्त्रियों को मासिकधर्म संबन्धित रोग हो सकते हैं।
  • किसी स्त्री की यौन उत्तेजना शांत न होने के कारण भी उसे मासिकधर्म संबन्धित रोग हो सकते हैं।
  • दूषित पानी का सेवन करने के कारण भी स्त्रियों में मासिकधर्म संबन्धित रोग हो सकते हैं।
  • स्त्रियों के स्नायु में अधिक कमजोरी आने के कारण भी मासिकधर्म संबन्धित रोग स्त्रियों को हो सकते हैं।

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  • स्त्रियों में हारर्मोन्स संबन्धित रोग हो जाने के कारण भी उसे मासिकधर्म संबन्धित रोग हो सकते हैं। Ayurvedic Remedy For Menstrual Disorders.
  • स्त्रियों की जननेन्द्रियों में किसी तरह का रोग हो जाने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
  • अधिक मानसिक तनाव तथा अन्य रोगों के कारण भी यह रोग स्त्रियों को हो सकता है।

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