देवउठनी एकादशी का महत्व !! Dev Uthani Ekadashi Ka Mahatva

By | October 31, 2017

देवउठनी एकादशी का महत्व [ Dev Uthani Ekadashi Ka Mahatva ] :

देव उठनी एकादशी को प्रबोधनी एकादशी ( prabodhini ekadashi ) के नाम से भी जाना जाता हैं ! इस एकादशी को पापमुक्त करने वाली एकादशी माना जाता है ! वैसे तो सब एकादशी पापो से मुक्त होकर मोक्ष प्रदान करने की ही होती हैं ! लेकिन देव उठनी एकादशी का महत्व और एकादशी से बहुत अधिक माना जाता हैं ! इस एकादशी का फल राजसूय यज्ञ करने से जो फल व् पुण्य की प्राप्ति होती हैं उससे कई अधिक गुना पुण्य इस देवउठनी प्रबोधनी एकादशी को करने से मिलता हैं !

आषाढ़ से कार्तिक तक के समय को चातुर्मास कहते हैं । इन चार महीनों में भगवान विष्णु क्षीरसागर की अनंत शैय्या पर शयन करते हैं, इसलिए कृषि के अलावा विवाह आदि शुभ कार्य इस समय तक नहीं किये जाते। धार्मिक दृष्टिकोण से ये चार मास भगवान की निद्राकाल का माना गया है । ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य के मिथुन राशि में आने पर भगवान श्री हरि विष्णु शयन करते हैं और तुला राशि में सूर्य के जाने पर भगवान शयन कर उठते हैं। इनके सौने से चारों वर्ण की विवाह, यज्ञ आदि कार्य नहीं किए जाते । यज्ञोपवीतादि संस्कार, विवाह, दीक्षा ग्रहण, यज्ञ, नूतन गृह प्रवेश, गोदान, प्रतिष्ठा एवं जितने भी शुभ कर्म चातुर्मास में त्याग दिए जाते हैं । भगवान विष्णु के स्वरुप शालिगराम और माता तुलसी के मिलन का पर्व तुलसी विवाह हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है । देवोत्थान एकादशी के दिन मनाया जाने वाला तुलसी विवाह विशुद्ध मांगलिक और आध्यात्मिक है क्योंकि तुलसी को विष्णु प्रिया भी कहते हैं। इसीलिए तुलसी विवाह को देव जागरण के पवित्र मुहूर्त के स्वागत किया जाता है । इसका मतलब है कि तुलसी के माध्यम से भगवान का निमंत्रण । 

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  • देवउठनी एकादशी का उपवास करने से व्यक्ति को अश्वमेघ यज्ञ के समान फल मिलता हैं !
  • देवउठनी एकादशी का महत्व बताये हुए ब्रम्हा जी ने नारद मुनि जी से कहा है की इस दिन उपवास करने से व्यक्ति के जन्मों के पापों का नाश हो जाता हैं !
  • देवउठनी एकादशी व्रत की कथा सुनने से व् पढ़ने से व्यक्ति को 100 गायो के दान के बराबर पुण्य मिलता हैं !

देव उठनी ग्यारस अथवा प्रबोधिनी एकादशी कब हैं  ? : Dev Uthani Gyaras or Prabodhini Ekadashi Kab Hai ?

इस बार 2017  में देव उठनी ग्यारस अथवा प्रबोधिनी एकादशी 31 अक्टूबर, के दिन वार मंगलवार को मनाई जाएगी !

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