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कुंडली में दुर्घटना के योग !! Kundali Me Durghatna Ke Yog

कुंडली में दुर्घटना के योग [ Kundali Me Durghatna Ke Yog ] : 

  • यदि जातक की कुंडली में षष्ठ भाव में शनि शत्रु राशि या नीच का होकर केतु के साथ हो तो जातक की दुर्घटना पशु से चोट लग कर होती है !  
  • यदि जातक की कुंडली में षष्ठ भाव में मंगल हो व शनि की दृष्टि पड़े तो जातक की दुर्घटना मशीनरी से चोट लग कर होती है ! 
  • यदि जातक की कुंडली में अष्टम भाव में मंगल यदि शनि के साथ हो या शत्रु राशि का होकर सूर्य के साथ हो तो जातक को आग के द्वारा दुर्घटना होती है !
  • यदि जातक की कुंडली में चंद्रमा नीच का हो व मंगल भी साथ हो तो जातक की दुर्घटना जल में होती है !
  • यदि जातक की कुंडली में केतु नीच का हो या शत्रु राशि का होकर गुरु मंगल के साथ हो तो हार्ट से संबंधित ऑपरेशन हो सकता है ! 
  • यदि जातक की कुंडली में शनि-मंगल व् केतु अष्टम भाव में हों तो जातक की दुर्घटना वाहन आदि से होती है !
  • यदि जातक की जन्मकुंडली में वायु तत्व की राशि में चंद्र और राहु हो और उसे मंगल देखता हो तो जातक को हवा में जलने से मृत्यु भय रहता है !
  • यदि जातक की कुंडली में अष्टमेश के साथ द्वादश भाव में राहु होकर लग्नेश के साथ हो तो जातक की हवाई दुर्घटना होने की आशंका रहती है ! 
  • यदि जातक की कुंडली में द्वादशेश चंद्र लग्न के साथ हो व द्वादश में कर्क का राहु हो तो जातक को अकस्मात मृत्यु योग देता है ! 
  • यदि जातक की जन्मपत्रिका में मंगल-शनि-केतु सप्तम भाव में हों तो उस जातक का जीवनसाथी ऑपरेशन के कारण या आत्महत्या के कारण या किसी घातक हथियार से मृत्यु हो सकती है !
  • यदि जातक की जन्मपत्रिका में अष्टम में मंगल-शनि वायु तत्व में हों तो जातक की जलने से मृत्यु होने संभावना होती है !
  • यदि जातक की जन्मपत्रिका में सप्तमेश के साथ मंगल-शनि हों तो जातक के दुर्घटना के योग जब भी बनाते है !

Updated: December 20, 2016 — 4:26 pm

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