मांगलिक दोष निवारण ( Mangal Dosha Nivaran ) Manglik dosha

By | June 1, 2016

Mangal Dosha Nivaran or Manglik dosha Remedies Jyotish Upay :

मांगलिक दोष से दांपत्य सुख होता है क्षीण, मांगलिक दोष निवारण (Mangal Dosha Nivaran – Manglik dosha):

मंगल की महादशा में अगर कारक ग्रह मंगल हो तो आपको शुभ और फलदायी फल प्राप्त होते हैं। देखा जाए तो जन्म कुंडली में जिनके चौथे, आठवें और बारहवें स्थान पर मंगल ग्रह विराजमान रहता है, वे वास्तव में मंगल से ज्‍यादा प्रभावित होते हैं। 
मंगल ग्रह का सबसे अधिक फल मंगल की महादशा में ही मिलता है और उस समय के लग्न की स्थिति के अनुसार जातक के विवाह में लाभ होता है। मंगल अगर कारक नहीं हैं तो जातक को बहुत सावधान होकर रहना चाहिए। अगर जातक की स्थिति में मांगलिक दोष आ जाए तो उसका विपरीत फल मिलता है।

क्या है मंगल दोष (Mangal Dosha or Manglik dosha kya hai) ?

यदि जातक के जन्म चक्र में मंगल ग्रह लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, या द्वादश भाव में स्थित होता है, उसे ज्योतिष शास्त्र में मंगल दोष माना गया है।
ऐसे में उसके भावी जीवन साथी के जन्म चक्र (जन्म कुंडली) में उसके अनुरूप ग्रह नहीं हों, और उसका विवाह उससे कर दिया जाए तो जातक (वर) की मृत्यु भी हो सकती है। मंगल दोष दरअसल दांपत्य सुख को क्षीण कर देता है।

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ज्योतिष शास्त्र में मंगलदोष के निवारण के लिए जो कन्या या वर मांगलिक योग से प्रभावित हों उनका विवाह भी मंगलदोष वाल जातक (वर-वधू) के साथ ही करना चाहिए।

Mangal Dosha Nivaran - Manglik dosha Mangal Dosha Nivaran or Manglik dosha

मंगल दोष का निवारण (Mangal Dosha Nivaran – Manglik dosha Upay) :

मंगल दोष के निवारण के लिए आप किसी विद्वान से वैदिक अनुष्ठान कराएं। किसी कारण से ऐसा करने से असमर्थ हैं तो लाल मूंगा, ताम्र (तांबा), धातु, मसूर, लाल मसूर, गुड़ शुद्ध घी, रक्त चंदन, लाल कनेर का फूल, लाल केशर, लाल वस्त्र, सोना या लाल गेहूं का दान करें।
मूंगा रत्न धारण कर सकते हैं। मूंगा सात रत्ती का हो और उसे चांदी की अंगूठी में जड़वा कर मंगलवार के दिन धारण करें। जब मंगल की महादशा में मंगल का अंतर हो तो इष्टदेव का स्मरण करें। रामायण के सुंदर काण्ड का पाठ करें। रामचरितमानस का पाठ भी मंगल ग्रह का शमन करता है।

ध्यान रखें :

1. लाल रंग को देखें पर उस रंग के वस्त्र न पहनें।
2. क्रोध कम करें।
3. अधिक काम वासना से अलग रहें।
4. सकारात्मक सोच को और भी ज्यादा बेहतर बनाएं।
5. संयमित जीवन रखें।
6. मंगलवार को एक समय भोजन।
7. हनुमान चालीसा का पाठ करें।

मांगलिक योग का उपाय (Mangal Dosha Remedies – Manglik dosha Upay):

अगर किसी का विवाह कुण्डली के मांगलिक योग के कारण नहीं हो पा रहा है, तो ऎसे व्यक्ति को मंगल वार के दिन चण्डिका स्तोत्र का पाठ मंगलवार के दिन तथा शनिवार के दिन सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए. इससे भी विवाह के मार्ग की बाधाओं में कमी होती है.

मांगलिक दोष निवारण ( Mangal Dosha Nivaran Upay ) :

  • यदि जन्मकुंडली में मंगल दोष हो किन्तु शनि मंगल पर दृष्टिपात करे तो मंगल दोष का परिहार हो जाता है। मकर लग्न में मकर राशि का मंगल व सप्तम स्थान में कर्क राशि का चंद्र हो तो मंगल दोष नहीं रहता है।
  • कर्क व सिंह लग्न में भी लग्नस्थ मंगल केन्द्र व त्रिकोण का अधिपति होने से राजयोग देता है, जिससे मंगल दोष निरस्त होता है। लग्न में बुध व शुक्र हो तो मंगल दोष निरस्त होता है। मंगल अनिष्ट स्थान में है और उसका अधिपति केद्र व त्रिकोण में हो तो मंगल दोष समाप्त हो जाता है।
  • ऐसा कहा जाता है कि आयु के 28वें वर्ष के पश्चात मंगल दोष क्षीण हो जाता है। आचार्यों ने मंगल-राहु की युति को भी मंगल दोष का परिहार बताया है। यदि मंगल मेष, कर्क, वृश्चिक अथवा मकर राशि हो तो मंगल दोष का परिहार हो जाता है।

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  • कुण्डली मिलान में यदि मंगल चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, द्वादश भाव में हो व द्वितीय जन्मकुंडली में इन्हीं भावों में से किसी में शनि स्थित हो तो मंगल दोष निरस्त हो जाता है। चतुर्थ भाव का मंगल वृष या तुला का हो तो मंगल दोष का परिहार हो जाता है।
  • द्वादश भावस्थ मंगल कन्या, मिथुन, वृष व तुला का हो तो मंगल दोष निरस्त हो जाता है। वर की कुण्डली में मंगल दोष है व कन्या की जन्मकुण्डली में मंगल के स्थानों पर सूर्य, शनि या राहु हो तो मंगल दोष का स्वयमेव परिहार हो जाता है।

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