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मौनी अमावस्या का महत्व !! Mauni Amavasya Ka Mahatva

मौनी अमावस्या का महत्व [ Mauni Amavasya Ka Mahatva ] 

माघ मास में आने वाली अमावस्या “मौनी अमावस्या” के नाम से जानी जाती है ! “मौनी अमावस्या” का बड़ा महत्व ( mauni amavasya ka mahatva ) माना जाता है ! इस दिन मौन व्रत धारण करना चाहिए ! इस दिन मौन धारण करते हुए सूर्य उदय से पहले स्नान करना लाभकारी रहता है ! इस दिन धार्मिक स्थल पर जाकर स्नान करने से पुण्य मिलता है ! ऐसा माना जाता है की इस दिन संगम पर देव व् देवता स्नान करने आते है ! इसलिए इस दिन गंगा स्नान करने के लिए कहा जाता है ! यह मास भी कार्तिक मास के सामान पुण्य मास कहलाता है ! यदि “मौनी अमावस्या” सोमवार के दिन आ जाती है तो इसका महत्व ( mauni amavasya ka mahatva ) व् प्रभाव और दोनों से ज्यादा बढ़ जाता है ! हमारे शास्त्रों में कहा जाता है की सतयुग में जातक द्वारा तप करने से, त्रेता युग में जातक द्वारा ज्ञान से, द्वापर युग में श्री हरी की भक्ति से व् कलयुग में दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है ! इस दिन पवित्र नदियों व् धार्मिक स्थल पर जाकर स्नान करके सामर्थ के अनुसार दान करना चाहिए ! इस आप दान में अन्न, गर्म कपडे, धन, गो दान , भूमि, आदि का दान करना बहुत अच्छा रहता है ! इस दिन तिल का दान करना भी बहुत उत्तम रहता है ! पवित्र भाव से ब्राह्मण एवं परिजनों के साथ भोजन करें ! Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Sharma द्वारा बताये जा रहे मौनी अमावस्या का महत्व ( Mauni Amavasya Ka Mahatva ) को पढ़कर आप भी मौनी अमावस्या के बारे में सही से जानकारी प्राप्त कर सकोगें !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 7821878500

ये हैं मौनी अमावस्या से जुड़ी खास बातें : 

– धर्म शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन रहकर अथवा मुनियों के समान आचरण करने का विशेष महत्व है। इस तिथि पर सुबह स्नान कर तिल, तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, व वस्त्र का दान ( mauni amavasya par kya daan kare ) करना चाहिए। काले तिल के लड्डू बनाकर उसे लाल वस्त्र में बांधकर ब्राह्मण को दान देने एवं भोजन कराने से पितरों को शांति प्राप्त होती है। श्राद्ध तर्पणादि करने का भी इस दिन बड़ा महत्व माना गया है।

– अमा का अर्थ है करीब तथा वस्य का अर्थ है रहना। अमावस्या का पूर्ण अर्थ है करीब रहना। इस दिन चंद्रमा दिखाई नही देता तथा तिथियों में इस तिथि के स्वामी पितर होते हैं। चंद्रमा दिखाई नही देने से शरीर में एक महत्वपूर्ण तत्व जल का संतुलन ठीक नही रहता जिससे निर्णय सही नही हो पाते नकारात्मकता अधिक होती है। इस अमावस्या तिथि पर मौन रहने का बड़ा महत्व माना गया है तथा संयम पूर्वक रहने का विधान है।

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– अमावस्या तिथि होने से चंद्रमा सूर्य के साथ मकर राशि में होते हैं, जो शनि के स्वामित्व वाली राशि है। सूर्य एवं चंद्रमा दोनों से शनि शत्रु का भाव रखते हैं। चंद्रमा मन का स्वामी है उसके शत्रु राशि मे होने से मन चंचल होने के संभावना रहती है एवं स्वयं का अहित करने वाले विचार मन में आ सकते है। इसलिए इस दिन संयम पूर्वक बिताने की सलाह एवं मुनियों जैसा जीवन बिताने की सलाह हमारे धर्म ग्रंथों में दी गई है।

– अमावस्या को सूर्य चंद्रमा की युति वाणी संयम के लिए भी आवश्यक मानी गई अर्थात मौन रहें। यह नही हो सके तो किसी के भी प्रति कटु शब्दों को प्रयोग नही करें एवं असत्य भाषा से बचने का प्रयास करें। वाणी के इस संयम को भी मौन की संज्ञा दी गई है।

 

तिल का महत्व : 

मौनी अमावस्या पर तिल का महत्व ( mauni amavasya ka mahatva ) भी बढ़कर बताया गया है। सफेद तिल भगवान विष्णु को अतिप्रिय एवं काला तिल पितरों के तर्पण में प्रयोग होता है। अत: इस दिन देवों की तृप्ति के लिए सफेद तिल का एवं पितरों के लिए काले तिल का दान करना चाहिए। इसके साथ ही कपास एवं छत्री का दान करना भी शुभ फल देने वाला होता है।

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ऊनी वस्त्र का दान : 

इस अमावस्या पर शीत ऋतु अपने चरम पर होती है। इसलिए इस दिन जरूरतमंदों को कंबलादि ऊनी वस्त्र दान देना चाहिए। किसी गरीब को यदि स्वेटर, कंबलादि का दान दिया जाता है तो राहु एवं शनि की महादशा का अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसी दिन दूसरों के लिए अलाव जलाने से अग्रि देवता प्रसन्न होते हैं एवं सूर्य, मंगल एवं गुरु की कृपा प्राप्त होती है ! 

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