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रोग निवारण मंत्र !! Rog Nivaran Mantra

रोग निवारण मंत्र [ Rog Nivaran Mantra ] : 

आज हम आपको रोग निवारण के मंत्र के बारे में जानकारी देने जा रहे है यदि आप पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ करते हो तो सर्व प्रकार के रोग का निवारण हो सकता है साथ साथ आप कर्म भी करते जाये आप दिए हुए मंत्र का कम से कम १०८ बार हर रोज जाप करें और कुछ अन्य मंत्र की विधि मंत्र के साथ ही दी हुई है अब आप श्री हनुमान भक्त पंडित ललित ब्राह्मण के दिए मंत्र को पढ़े और लाभ उठए !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें : 7821878500

  • सात जटा वाले नारियल शुक्ल पक्ष के सोमवार को “ॐ नम शिवाय मन्त्र” का जाप करते हुए नदी में प्रवाहित करने से उस व्यक्ति के घर से रोग और दरिद्रता का नाश होता है !! 
  • हृदय विकार, रक्तचाप के लिए एकमुखी या सोलहमुखी रूद्राक्ष श्रेष्ठ होता है। इनके न मिलने पर ग्यारहमुखी, सातमुखी अथवा पांचमुखी रूद्राक्ष का उपयोग कर सकते हैं। इच्छित रूद्राक्ष को लेकर श्रावण माह में किसी प्रदोष व्रत के दिन, अथवा सोमवार के दिन, गंगाजल से स्नान करा कर शिवजी पर चढाएं, फिर सम्भव हो तो रूद्राभिषेक करें या शिवजी पर “ॐ नम: शिवाय” बोलते हुए दूध से अभिषेक कराएं। इस प्रकार अभिमंत्रित रूद्राक्ष को काले डोरे में डाल कर गले में पहनें।
  • यदि आपका बच्चा बहुत जल्दी-जल्दी बीमार पड़ रहा हो और आप को लग रहा कि दवा काम नहीं कररही है, डाक्टर बीमारी खोज नहीं पा रहे है। तो यह उपाय शुक्ल पक्ष की अष्टमी को करना चाहिये। आठगोतमी चक्र ले और अपने पूजा स्थान में मां दुर्गा के श्रीविग्रह के सामने लाल रेशमी वस्त्र पर स्थान दें। मांभगवती का ध्यान करते हुये कुंकुम से गोमती चक्र पर तिलक करें। धूपबत्ती और दीपक प्रावलित करें।धूपबत्ती की भभूत से भी गोमती चक्र को तिलक करें। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे की 11 माला जापकरें। जाप के उपरांत लाल कपड़े में 3 गोमती चक्र बांधकर ताबीज का रूप देकर धूप, दीप दिखाकर बच्चे केगले में डाल दें। शेष पांच गोमती चक्र पीले वस्त्र में बांधकर बच्चे के ऊपर से 11 बार उसार कर के किसीविराने स्थान में गड्डा खोदकर दबा दें। आपका बच्चा हमेशा सुखी रहेगा।
  • यदि आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है तो आश्विन मास की त्रयोदशी को नित्य कर्म से निपट करसात्विक भाव से कुशासन पर बैठकर गोघृत का दीपक जलाकर नीचे लिखे मन्त्र का 128000 बार जाप करें- अच्युताय नमः अनन्ताय नमः गोविन्दाय नमः। यदि एक दिन में मन्त्र पूर्ण न हो तो दूसरे दिन निराहार रहकर मात्र गाय का दूध पीकर पूरा करें। इससे मन्त्र सिद्ध हो जाएगा और दशांश का इस मन्त्र सेहवन करें। बाद में रोगी व्यक्ति के शरीर का स्पर्श करते हुए इस मन्त्र का जाप करेंगे तो रोगी व्यक्ति कोस्वास्थ्य लाभ होगा। भगवान्‌ धन्वन्तरि का कथन है कि अच्युतानन्त गोविन्द नामोच्चारण-भेषजात्‌।नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यं सत्यं वदाम्यहम्‌। अर्थात्‌ अच्युत, अनन्त और गोविन्द के नामों का मन मेंजाप करने से सम्पूर्ण रोगों का नाश हो जाता है, इसमें सन्देह नहीं है।

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  • किसी पुरानी मूर्ति के ऊपर घास उगी हो तो शनिवार को मूर्ति का पूजन करके, प्रात: उसे घर ले आएं। उसे छाया में सुखा लें। जिस कमरे में रोगी सोता हो, उसमें इस घास में कुछ धूप मिला कर किसी भगवान के चित्र के आगे अग्नि पर सांय, धूप की तरह जलाएं और मन्त्र विधि से “ॐ माधवाय नम:। ॐ अनंताय नम:। ॐ अच्युताय नम:।” मन्त्र की एक माला का जाप करें। कुछ दिन में रोगी स्वस्थ हो जायेगा। दान-धर्म और दवा उपयोग अवश्य करें। इससे दवा का प्रभाव बढ़ जायेगा।
  • किसी भी प्रेत बाधा से मुक्त होने लिए लगातार 21 दिन तक प्रतिदिन सूर्यास्त के समय गाय का आधा किलो दूध लें तथा उसमें नौ बूंद शुद्ध शहद और 10 बूंद गंगाजल डालें। शहद और गंगाजल मिश्रित दूध को शुद्ध बर्तन में रखकर शुद्ध वस्त्र पहनकर हर-हर गंगे बोलते हुए घर में छिड़काव करें। छिड़काव करने के बाद मुख्य दरवाजे पर आकर शेष बचे हुए दूध को धार बांधकर वहीं पर गिरा दें और बोलें- संकट कटे मिटे सब पीरा। जो सुमिरे हनुमत बलवीरा।। यह क्रिया 21 दिन तक करते रहें।
  • इस मंत्र ‘ॐ सर्व रोगहराय नमः’ का 11 शनिवार या मंगल के दिन उतारा करके काले भैंसे को खिला दें। 3, 5 या 7 मंगल से शनिवार तक करें, रोगी को लाभ हो जाएगा।
  • लंबी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ के लिए गुड़ के गुलगुले सवा किलो सरसों के तेल में पकाकर शनिवार व रविवार को रोगी के शरीर के ऊपर से उतारा करके उक्त मंत्र ‘ॐ रक्षो विध्वंशकारकाय नमः’ को 7 बार बोलें। फिर चील, कौए, कबूतर, चिड़ियों को गुलगुले के टुकड़े डालें तथा बंदरों को चना, गुड़ खिलाएं। ऐसा 3, 5 या 7 बार करें निश्चित लाभ होता है।
  • महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। द्रोव, शहद और तिल मिश्रित कर शिवजी को अर्पित करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ षडाक्षर मंत्र का जप भी करें, लाभ होगा। 
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