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श्री गणेश चतुर्थी पूजा विधि !! Shri Ganesh Chaturthi Pooja Vidhi

श्री गणेश चतुर्थी पूजा विधि [ Shri Ganesh Chaturthi Pooja Vidhi ] : 

हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन को भगवान श्री गणेश जी का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को श्री गणेश चतुर्थी उत्सव बनाया जाता हैं  श्री गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी, सिद्धिविनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। श्री गणेश जी की सबसे पहले पूजा की जाती है ! जो विघ्नों का नाश करने वाले और ऋद्धि-सिद्धि के दाता हैं। इसलिए इन्हें सिद्धि विनायक भगवान भी कहा जाता है। इस साल श्री गणेश चतुर्थी 25 अगस्त, शुक्रवार को बनाई जाएगी ! इस दिन जो भगवान श्री गणेश जी का शुध्द मन और तन से उपवास, पूजन और दान करता है,  उस व्यक्ति श्री गणेश मनोवांछित फल देते हैं ! गणेश चतुर्थी को गणपति जी का पूजन और उपासना करने से घर में संपन्‍नता, समृद्धि, सौभाग्य और धन का समावेश होता है। इस दिन आप श्री गणेश जी की पूजा करने से किसी कामनापूर्ति स्त्री, पुत्र, पौत्र, धन, समृद्धि के लिए या फिर अचानक ही किसी संकट मे पड़ जाना आदि से निवारण काम हो जाते हैं !! Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Sharma द्वारा बताये जा रहे Ganesh Chaturthi Pooja Vidhi को करके आप भी अपने जीवन में फायदा व् लाभ उठा सकते है !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 7821878500

श्री गणेश चतुर्थी कब हैं : Shri Ganesh Chaturthi Kab Hain :

तारीख : 25 अगस्त 2017, वार : शुक्रवार को !

गणेश मूर्ति स्थापना मुहूर्त : Ganesh Murti Sthapana Muhurat

श्री गणेश चतुर्थी 25 अगस्त वार शुक्रवार को है पर इस दिन भद्रा रहेगी । इस दिन सुबह 08:29 बजे से भद्रा आरंभ होगी जो रात 08:32 बजे समाप्त होगी । इस दिन पाताल लोक की भद्रा है इसलिए लाभप्रद है ! ज्योतिष के अनुसार भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य एवं प्रतिमा स्थापना शुभ नहीं मानी जाती है अतः चतुर्थी पर भद्रा काल को छोड़कर गणेश प्रतिमा स्थापना के लिए सुबह 06:07 से सुबह 08:28 तक लाभ का चौघडिय़ां सबसे सर्वश्रेष्ठ रहेगा !

बहुत से ज्योतिषाचार्य श्री गणेश जी को प्रथम पूज्य देव मानने के कारण श्री गणेश स्थापना में कोई मुहूर्त न देखने के लिए देखा गया है इसलिए इसे लोंगो के लिए चौघडिय़ा का समय निम्न प्रकार से है : shri ganesh chaturthi sthapana time 

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सबसे सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त : सुबह : 11:12 बजे से दोपहर 01:45 बजे तक जिसमें अभिजीत मुहूर्त और वृश्चिक लग्न श्रेष्ठ रहेगा जो की दोपहर 12:29 से दोपहर 02:05 बजे तक यह लग्न रहेगा !

लाभ व् अमृत  : सुबह 06:07 से सुबह 10:53 बजे तक !

शुभ : दोपहर 12:29 से दोपहर 02:05 बजे तक !

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:04 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक !

चर : शाम 05:16 बजे से शाम 06:51 बजे तक !

दोपहर में अभिजीत मुहूर्त अथवा शाम को लाभ अमृत के चौघडिय़ा में भी प्रतिमा की स्थापना कर सकते हैं।

गणपति विसर्जन तिथियाँ या तारीखें : 

26 अगस्त, 2017 को गणेश विसर्जन डेढ़ दिन पर होगा !

27 अगस्त, 2017 को गणेश विसर्जन तीसरे दिन होगा !

29 अगस्त, 2017 को गणेश विसर्जन 5 वें दिन होगा !

1 सितंबर, 2017 को गणेश विसर्जन 7 वें दिन होगा !

10 वें दिन गणेश विसर्जन 4 सितंबर, 2017 को होगा !

11 वें दिन (अनंत चतुर्दशी) गणेश विसर्जन 5 सितंबर, 2017 को होगा !

कुछ लोग गणेश चतुर्थी के अगले दिन गणेश विसर्जन करते हैं, हालांकि कुछ लोग गणेश चतुर्थी के बाद 3, 5, 7, 10 वें और 11 वें दिन पर गणेश विसर्जन करते हैं !

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गणपति विसर्जन मुहूर्त : Ganpati Visarjan Muhurat 

तारिख :- 05-09-2017 अनन्त  चतुर्दशी है इस दिन गणपति विसर्जन का समय

चल : सुबह : 09-32बजे से सुबह 11:06 तक !

लाभ : सुबह : 11:06बजे से दोपहर : 12:39 बजे तक !

अभिजित : दोपहर : 12:14 बजे से दोपहर : 01-04 बजे तक !

अमृत : दोपहर : 12:39 बजे से दोपहर : 02:13 बजे तक !

शुभ : दोपहर : 03:47 बजे से शाम : 05:20 बजे तक !

श्री गणेश पूजन विधि : Shri Ganesh Chaturthi Puja Vidhi

सुबह जल्दी उठकर पहले नित्यादि क्रियाओं से निवृत्त होकर शुद्ध आसन पर बैठकर अपना मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की तरफ करके करें। सबसे पहले एक ईशान कोण में स्वच्छ जगह पर पाटा अथवा चौकी रख कर उस पर लाल अथवा पीला कपड़ा बिछाते हैं |श्री गणेश जी को ईशाण कोण में स्थापित करें और उनका श्री मुख पश्चिम की ओर रहे।

कपड़े पर केले के पत्ते को रख कर अपने सामर्थ्य के अनुसार सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। और सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि एकत्रित कर क्रमश: पूजा करें।

भगवान श्री गणेश को तुलसी दल व तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। पंचामृत से श्री गणेश को स्नान कराएं, उन्हें, गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं। उन्हें रक्तवर्ण के पुष्प विशेष प्रिय हैं। शुद्ध स्थान से चुनी हुई दूर्वा को धोकर मंत्र बोलते हुए 21 दूर्वा-दल चढ़ाएं! गणेशजी को 21 दूर्वा दल चढ़ाई जाती है। दूर्वा दल चढ़ाते समय नीचे लिखे मंत्रों का जप करें :

ऊँ गणाधिपाय नम:

ऊँ उमापुत्राय नम:

ऊँ विघ्ननाशनाय नम:

ऊँ विनायकाय नम:

ऊँ ईशपुत्राय नम:

ऊँ सर्वसिद्धप्रदाय नम:

ऊँ एकदन्ताय नम:

ऊँ इभवक्त्राय नम:

ऊँ मूषकवाहनाय नम:

ऊँ कुमारगुरवे नम:

श्री गणेश भगवान को मोदक (लड्डू) अधिक प्रिय होते हैं इसलिए उन्हें देशी घी से बने 21 लड्डुओं का भोग लगाए चाहिए। इनमें से 5 लड्डू मूर्ति के पास चढ़ाएं और 5 ब्राह्मण को प्रदान कर दें। शेष लड्डू प्रसाद रूप में बांट दें। ( पूजन करने के बाद ) 

जाने : श्री गणेश स्थापना कंहा करें और कैसे करें : Click Here

गणेश चतुर्थी की कथा, गणेश पुराण, गणेश चालीसा, गणेश स्तुति, श्री गणेश सहस्रनामावली, गणेश जी की आरती, संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें. और श्री गणेश स्त्रोत से विशेष फल की प्राप्ति होती है। अंत में गणेश मंत्र ‘ ऊं गणेशाय नम:’ अथवा ‘ऊं गं गणपतये नम: का अपनी श्रद्धा के अनुसार जाप करें। श्रीगणेश सहित प्रभु शिव व गौरी, नन्दी, कार्तिकेय सहित सम्पूर्ण शिव परिवार की पूजा षोड़षोपचार विधि से करना चाहिए। व्रत व पूजा के समय किसी प्रकार का क्रोध व गुस्सा न करें। यह हानिप्रद सिद्ध हो सकता है। श्रीगणेश का ध्यान करते हुए शुद्ध व सात्विक चित्त से प्रसन्न रहना चाहिए।

शास्त्रानुसार श्रीगणेश की पार्थिव प्रतिमा बनाकर उसे प्राणप्रति‍ष्ठित कर पूजन-अर्चन के बाद विसर्जित कर देने का आख्यान मिलता है। किन्तु भजन-कीर्तन आदि आयोजनों और सांस्कृतिक आयोजनों के कारण भक्त 1, 2, 3, 5, 7, 10 आदि दिनों तक पूजन अर्चन करते हुए प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।

किसी भी पूजा के उपरांत सभी आवाहित देवताओं की शास्त्रीय विधि से पूजा-अर्चना करने के बाद उनका विसर्जन किया जाता है, किन्तु श्री लक्ष्मी और श्रीगणेश का विसर्जन नहीं किया जाता है। इसलिए श्रीगणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन करें, किन्तु उन्हें अपने निवास स्थान में श्री लक्ष्मी जी सहित रहने के लिए निमंत्रित करें। पूजा के उपरांत अपराध क्षमा प्रार्थना करें, सभी अतिथि व भक्तों का यथा व्यवहार स्वागत करें। पूजा कराने वाले ब्राह्मण को संतुष्ट कर भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा देने के बाद प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर शाम के समय स्वयं भोजन ग्रहण करें। Ganesh Chaturthi puja at home

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