तिथिनुसार कब और किसका करें पितृ श्राद्ध !! Tithi Anusar Kab Or Kiska Kare Pitru Shradh

By | September 5, 2017

तिथिनुसार कब और किसका करें पितृ श्राद्ध [ Tithi Anusar Kab Or Kiska Kare Pitru Shradh ] :

आप सब को मालूम होगा की श्राद्ध पक्ष का प्रारंभ 06 सितंबर, 2017 ( पूर्णिमा, बुधवार ) से शुरू हो रहे है, जिसका समापन 20 सितंबर, ( अमावस्या, बुधवार ) को पूर्ण होगा ! श्राद्धों का पितरों के साथ अटूट संबंध है ! जिस ‘मृत व्यक्ति’ के एक वर्ष तक के सभी और्ध्व दैहिक क्रिया कर्म संपन्न हो जायें, उसी की ‘पितर’ संज्ञा हो जाती है! जिस तिथि को अपने सगे-संबंधी की मृत्यु होती है, उसी दिन उनके निमित्त श्राद्ध करना चाहिए ! और जिस व्यक्ति की तिथि याद ना रहे तब उस अवस्था में अमावस्या के दिन उसका श्राद्ध करने का विधान होता है Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Sharma द्वारा बताये जा रहे Tithi Anusar Kab Or Kiska Kren Pitr Shradh को करके आप भी अपने जीवन में फायदा व् लाभ उठा सकते है !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 7821878500

जिन जातक के जन्म पत्रिका में पितृ दोष उन जातक को विधि विधान से अपने पितरों का श्राद्ध करने से पितृ दोष से मुक्ति होती है ! साधारणत: पुत्र ही अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं ! किन्तु शास्त्रानुसार ऐसा हर व्यक्ति जिसने मृतक की सम्पत्ति विरासत में पायी है और उससे प्रेम और आदर भाव रखता है, उस व्यक्ति का स्नेहवश श्राद्ध कर सकता है। विद्या की विरासत से भी लाभ पाने वाला छात्र भी अपने दिवंगत गुरु का श्राद्ध कर सकता है ! पुत्र की अनुपस्थिति में पौत्र या प्रपौत्र भी श्राद्ध-कर्म कर सकता है !

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पितृ श्राद्ध 2017 तिथि :

  • दिनांक : 06  सितम्बर – पूर्णिमा श्राद्ध स्नान आदि , प्रतिपदा श्राद्ध
  • दिनांक : 07 सितम्बर –  द्वितिय श्राद्ध
  • दिनांक : 08 सितम्बर – तृतीय श्राद्ध
  • दिनांक : 09  सितम्बर – श्री गणेश चतुर्थी व्रत , चतुर्थ श्राद्ध
  • दिनांक : 10  सितम्बर – पंचमी श्राद्ध
  • दिनांक : 11 सितम्बर -चंद्र षष्ठी व्रत , षष्ठी श्राद्ध
  • दिनांक : 12  सितम्बर – सप्तमी श्राद्ध

  • दिनांक : 13  सितम्बर – अष्टमी श्राद्ध
  • दिनांक : 14  सितम्बर – नवमी श्राद्ध
  • दिनांक : 15  सितम्बर – दशमी श्राद्ध
  • दिनांक : 16  सितम्बर –  एकादशी श्राद्ध
  • दिनांक : 17  सितम्बर – द्वादशी श्राद्ध, त्रयोदशी श्राद्ध
  • दिनांक : 18  सितम्बर – चतुर्दशी श्राद्ध
  • दिनांक : 19  सितम्बर – अमावस श्राद्ध , पितृकार्येषु
  • दिनांक : 20  सितम्बर – आश्विन अमावस स्नान , देवकार्यषु

जिन लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि का पता नही है उसके लिए भी श्राद्ध-पक्ष में कुछ विशेष तिथियाँ निर्धारित की गई हैं ! उन तिथियों पर वे लोग पितरों के निमित श्राद्ध कर सकते है ! और अपने पितृ को खुश कर सकते है !

  • प्रतिपदा : आश्विन शुक्ल की प्रतिपदा को नाना-नानी / दादी के श्राद्ध के लिए सही बताया गया है ! इस तिथि को श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है ! यदि नाना-नानी के परिवार में कोई श्राद्ध करने वाला न हो और उनकी मृत्युतिथि याद न हो, तो आप इस दिन उनका श्राद्ध कर सकते हैं !
  • पंचमी : जिन लोगों की मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई हो, उनका श्राद्ध इस तिथि को किया जाना चाहिये ।
  • नवमी : सौभाग्यवती यानि पति के रहते ही जिनकी मृत्यु हो गई हो, उन स्त्रियों का श्राद्ध नवमी को किया जाता है । यह तिथि माता के श्राद्ध के लिए भी उत्तम मानी गई है । इसलिए इसे मातृ-नवमी भी कहते हैं । मान्यता है कि – इस तिथि पर श्राद्ध कर्म करने से कुल की सभी दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध हो जाता है !

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  • एकादशी और द्वादशी : एकादशी में वैष्णव संन्यासी का श्राद्ध करते हैं । अर्थात् इस तिथि को उन लोगों का श्राद्ध किए जाने का विधान है, जिन्होंने संन्यास लिया हो !
  • त्रयोदशी : इस तिथि में जिन बच्चों की अकाल मृत्यु हुई हो उनका श्राद्ध किया जाता है ।
  • चतुर्दशी : इस तिथि में शस्त्र, आत्म-हत्या, विष और दुर्घटना यानि जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो उनका श्राद्ध किया जाता है ।
  • सर्वपितृमोक्ष अमावस्या : किसी कारण से पितृपक्ष की अन्य तिथियों पर पितरों का श्राद्ध करने से चूक गये हैं या पितरों की तिथि याद नहीं है ! तो इस तिथि पर सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है । पितृ स्तोत्र पढ़ने के लिए लिए करें : Click Here

शास्त्र अनुसार इस दिन श्राद्ध करने से कुल के सभी पितरों का श्राद्ध हो जाता है! यही नहीं जिनका मरने पर संस्कार नहीं हुआ हो, उनका भी अमावस्या तिथि को ही श्राद्ध करना चाहिये । बाकी तो जिनकी जो तिथि हो, श्राद्धपक्ष में उसी तिथि पर श्राद्ध करना चाहिये यही उचित भी है !

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