उर्ध्वहस्तोत्तानासन योग ( Urdhva Hastottnasan Yoga )

By | July 29, 2016

उर्ध्वहस्तोत्तानासन योग ( Urdhva Hastottnasan Yoga ) :

उर्ध्वहस्तोत्तानासन योग ( Urdhva Hastottnasan Yoga ke Labh in Hindi ) :

  • परिचय-

Urdhva Hastottnasan Yoga – उर्ध्वहस्तोत्तानासन का अभ्यास खुले व हवादार स्थान पर करें। इस आसन को करने से शरीर में खिंचाव पैदा होता है और अनेक रोगों में लाभ होता है। यह शंख प्रक्षालन के 4 आसनों में से एक आसन है। शंख प्रक्षालन की क्रिया को इस आसन के बिना पूरा करना असम्भव है।

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  • आसन करने की विधि (Urdhva Hastottnasan Yoga Vidhi) :

इस आसन के अभ्यास के लिए सीधे सावधान की स्थिति में खड़ें हो जाएं फिर दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में जोड़कर ऊपर की ओर उठाएं। हाथों को ऊपर उठाते हुए हथेलियों को ऊपर की ओर रखें। आसन की इस स्थिति में आने के बाद हाथों को ऊपर की ओर खींचते हुए शरीर में खिंचाव लाएं और धीरे-धीरे दाईं तरफ जितना सम्भव हो झुकें। कुछ क्षण तक इस स्थिति में रहे और फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं ! इसके बाद फिर धीरे-धीरे बाईं तरफ झुकें और कुछ क्षण रुकें। फिर धीरे-धीरे सीधे खड़े हो जाएं। इस आसन को करते समय घुटनों व हाथों को तानकर रखें तथा इसे दोनों तरफ से बराबर-बराबर करें।

  • आसन के अभ्यास से रोगों में लाभ (Urdhva Hastottnasan Yoga Labh) :

उर्ध्वहस्तोत्तानासन के अभ्यास से शरीर की लंबाई बढ़ती है और सभी अंगों का विकास होता है। यह शंख प्रक्षालन के 4 आसनों में से एक आसन है तथा इस आसन के बिना शंख प्रक्षालन क्रिया को पूरा करना सम्भव नहीं है। यह आसन छाती को चौड़ा करता है, कमर को पतली बनाता है तथा नितम्ब पर बनी अधिक चर्बी को खत्म करता है। इसके द्वारा शरीर आकर्षक व सुन्दर बनता है। इससे आंतों की मसाज अच्छी तरह से हो जाती है। इसके अभ्यास से कब्ज मिटती है. पसली का दर्द दूर होता है। यह आसन शंख प्रक्षालन की शोधन क्रिया में किया जाता है. जिसे वारिसार भी कहते हैं। इस आसन को करने से साईटिका का दर्द तथा कमर व जांघों का भारीपन समाप्त होता है। इस आसन को गर्भवती स्त्रियां भी कर सकती हैं। जिन लोगों को कब्ज की शिकायत अधिक रहती हो उन्हें सुबह 2 गिलास पानी पीने के बाद ताड़ासन करना चाहिए। फिर इसके बाद ऊर्ध्व हस्तपदासन का अभ्यास दोनों ओर से 4-4 बार करें और अंत में कटिचक्रासन का अभ्यास करके इस आसन को पूरा करें।

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