Basant Panchami Ki Puja Vidhi !! Basant Panchami Ke Din Kaise Kare Puja

By | February 1, 2017

बसंत पंचमी की पूजा विधि [ Basant Panchami Ki Puja Vidhi or Basant Panchami Ke Din Kaise Kare Puja ]

हर वर्ष माघ मास की शुक्ल पंचमी को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। बसंत का शाब्दिक अर्थ है मादकता । इस समय धरती पर उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है, वृक्षों में नई कपोलें आने लगती है, पौधों में नयी कलियाॅ प्रस्फुटित होेने लगती है। वसंत पंचमी से पाॅच दिन पहले से ही वसंत ऋतु आरम्भ हो जाती है। इस समय चारों ओर हरियाली व खुशहाली का वातावरण छाया रहता है। हर तरफ रंग-बिरंगे फूल दिखाई पड़ने लगते है। खेतों में पीली सरसों लहलहाती हुयी हर व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करती है। वसंत ऋतु को सभी ऋतुओं का राजा कहा जाता है। बसंत पंचमी के कामदेव व रति की पूजा की जाती है एंव इसी दिन माता सरस्वती का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है । देवी भागवत के अनुसार देवी माँ सरस्वती जी की पूजा सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्ण जी ने की थी । Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Sharma द्वारा बताये जा रहे बसंत पंचमी के दिन कैसे करें पूजा ( Basant Panchami Ke Din Kaise Kare Puja ) को पढ़कर आप भी बहुत आसन तरीके बसंत पंचमी के दिन माता श्री सरस्वती देवी की पूजा विधि कर सकोंगे !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 7821878500

बसंत पंचमी कब की है : basant panchami kab ki hai 

इस वर्ष २०१८ में बसंत पंचमी जनवरी की 22 तारीख वार सोमवार के दिन मनाई जाएगी ! 

कैसे उत्पन्न हुई माता श्री सरस्वती देवी : 

ऐसी मान्यता है कि सृष्टि निर्माण के समय सर्वप्रथम आदि शक्ति का प्रादुर्वभाव हुआ। देवी महालक्ष्मी के आवाहन पर त्रिदेव यानि शिव, विष्णु व ब्रम्हा जी उपस्थित हुये। तत्पश्चात देवी लक्ष्मी ने तीनों देवों से अपने-अपने गुणों के अनुसार देवियों को उत्पन्न करने की स्तुति की। माॅ लक्ष्मी की प्रार्थना स्वीकार करके तीनों देवों ने अपने गुणों के अनुरूप देवियों का आवाहन किया। सबसे पहले भगवान शिव ने तमोगुण से महाकाली को प्रकट किया, भगवान विष्णु ने रजोगुण से माॅ लक्ष्मी को और ब्रम्हा जी ने अपने सत्वगुण से देवी सरस्वती का आवाहन किया । 

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माॅ सरस्वती को क्यों कहा जाता है वाणी की देवी- ब्रम्हा जी ने सृष्टि का निर्माण करने के बाद जब अपने द्वारा बनाई गई सृष्टि को मृत शरीर की भाॅति शान्त, व स्वर विहीन पाया तो ब्रहमा जी उदास होकर बिष्णु जी से अपनी व्यथा को व्यक्त किया। विष्णु जी ने ब्रहमा से कहा कि आपकी इस समस्या का समाधान सरस्वती जी कर सकती है। सरस्वती जी की वाणी के स्वर से आपकी सृष्टि में ध्वनि प्रवाहित होने लगेगी। तब ब्रहमा जी ने सरस्वती देवी का आवाहन किया। सरस्वती जी के प्रकट होने पर ब्रहमा जी ने अनुरोध किया हे देवी आप-अपनी वाणाी से सृष्टि में स्वर भर दो। माता सरस्वती ने जैसे ही वीणा के तारों को स्पर्श किया वैसे ही “सा” शब्द फूट पड़ा। यह शब्द संगीत के सप्तसुरों में प्रथम सुर है ! 

 

इस ध्वनि से ब्रहमा जी की मूक सृष्टि में स्वरमय ध्वनि का संचार होने लगा। हवाओं को, सागर को, पशु-पक्षियों एंव अन्य जीवों को वाणी मिल गई। नदियों में कलकल की आवाज आने लगी। इससे ब्रहमा जी ने प्रसन्न होकर सरस्वती को वाणी की देवी के नाम से सम्बोधित करते हुये वागेश्वरी नाम दे दिया । 

बसंत पंचमी का मुहूर्त 2018 : basant panchami ka muhurat 2018

इस दिन बसंत पंचमी का पूजा मुहूर्त का शुभ समय सूर्य उदय से सुबह 11 बजकर 18 मि0  तक है ! 

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माॅ सरस्वती देवी की पूजा विधि : maa saraswati puja vidhi 

देवी भागवत के अनुसार देवी सरस्वती की पूजा सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्ण ने की थी । प्रातःकाल समस्त दैनिक कार्यो से निवृत होकर स्नान, ध्यान करके माॅ सरस्वती की तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद कलश स्थापित गणेश जी तथा नवग्रहों की विधिवत पूजा करें। सरस्वती जी का पूजन करते समय सबसे पहले उनको स्नान करायें। तत्पश्चात माता को सिन्दूर व अन्य श्रंगार की वस्तुये चढ़ायें फिर फूल माला चढ़ाये। मीठे का भोगलगार सरस्वती कवच का पाठ करें। देवी सरस्वती के इस मन्त्र का जाप करने से ”श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा” असीम पुण्य मिलता है ! 

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